हिमालय

दोस्तों, तुमने पर्वत और पहाड़ तस्वीरों में खूब देखे होंगे। यदि तुम अपने पेरेंट्स के साथ कभी किसी हिल स्टेशन पर घूमने गए होगे तो तुमने इन पहाड़ों की खूबसूरती को जरूर देखा होगा। इन्हीं पर्वतों के नामों में एक नाम शुमार है हिमालय का। हिमालय इस दुनिया की सबसे खूबसूरत पर्वत श्रृंखलाओं में गिना जाता है। इसी हिमालय की कुछ जानकारी तुमको दे रहे हैं अजय शर्मा।

हिमालय संस्कृत के हिम तथा आलय दो शब्दों से मिल कर बना है, जिसका अर्थ होता है बर्फ का घर। हिमालय नेपाल और भारत की धरोहर है, क्योंकि इसका कुछ हिस्सा नेपाल में भी है। हिमालय एक पर्वत श्रृंखला है, जो भारतीय उपमहाद्वीप को मध्य एशिया और तिब्बत से अलग करती है। संसार की अधिकाश ऊंची पर्वत चोटियां हिमालय में ही मौजूद हैं। विश्व के 100 सर्वोच्च शिखरों में हिमालय की अनेक चोटियां हैं।

हिमालय का सर्वोच्च शिखर सागर माथा या माउंट एवरेस्ट हिमालय का ही एक शिखर है। अन्य पर्वतों की अपेक्षा यह काफी नया है और अभी भी यह विकसित हो रहा है। हिमालय में 100 से ज्यादा पहाड़ हैं, जो 7200 मीटर में फैले हुए हैं। ये सभी पहाड़ छह देशों की सीमाओं को छूते हैं। ये देश हैं नेपाल, भारत, भूटान, तिब्बत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान। हिमालय से कुछ प्रमुख नदियां भी निकलती हैं, जिनमें शामिल हैं- सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र और यांगतेज। हिमालय रेंज में 15 हजार से ज्यादा ग्लेशियर हैं, जो 12 हजार वर्ग किलोमीटर में फैले हुए हैं।

70 किलोमीटर लंबा सियाचिन ग्लेशियर विश्व का दूसरा सबसे लंबा ग्लेशियर है। हिमालय में कुछ महत्त्वपूर्ण धार्मिक स्थल भी है। इसमें हरिद्वार, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गोमुख, देवप्रयाग, ऋषिकेश, माउंट कैलाश, मनसरोवर तथा अमरनाथ हैं।

हिमालय का महत्त्व

हिमालय का भारत में एक महत्त्वपूर्ण स्थान है। इससे अधिकतर पानी की आपूर्ति की जाती है। इसके आस-पास के क्षेत्र काफी उपजाऊ हैं, जिनमें काफी अच्छे स्तर पर खेती की जाती है, जिसकी वजह से इसका महत्त्व काफी बढ़ जाता है।

भारत में पानी की आवश्यकता की अधिकांश आपूर्ति हिमालय से ही होती है। पेयजल व कृषि के अलावा देश में पनबिजली के उत्पादन में हिमालय से प्राप्त होने वाले पानी का बड़ा महत्त्व है। पानी के अतिरिक्त हिमालय से बेशकीमती वनोपज भी मिलती है। इतिहास गवाह है कि वर्षों से यह विदेशी आक्रमणों से भारत की रक्षा भी करता आ रहा है। अनेक विश्वप्रसिद्ध, मनोरम पर्यटन स्थल इसकी गोद में ही बसे हैं, जो सैलानियों का स्वर्ग कहलाते हैं। प्राचीन काल से ही इसे नेपाल और भारत का गौरव जैसी संज्ञा दी जाती है। योगियों तथा ऋषियों की तपोभूमि रहा यह क्षेत्र पर्वतारोहियों को बहुत आकर्षित करता है।

बच्चो, क्या तुमको पर्वत का मतलब पता है? पहाड़ी और पर्वत में क्या अन्तर है? नहीं पता, कोई बात नहीं, हम बताते हैं। पर्वत या पहाड़ पृथ्वी की भू-सतह पर प्राकृतिक रूप से ऊंचा उठा हुआ हिस्सा होता है, जो ज्यादातर आकस्मिक तरीके से उभरा होता है और पहाड़ी से बड़ा होता है। पर्वत ज्यादातर एक लगातार समूह में होते हैं। पर्वत 4 प्रकार के होते हैं- 1. बलित पर्वत, 2. भरोंथ पर्वत या ब्लोक पर्वत, 3. ज्वालामुखी पर्वत, 4. अवसिस्त पर्वत।

अब आपको बताते हैं माउंट एवरेस्ट के बारे में-

एवरेस्ट पर्वत, जिसे नेपाली में सागरमाथा और संस्कृत में देवगिरि कहते हैं, दुनिया का सबसे ऊंचा पर्वत शिखर है। इसकी ऊंचाई 8,848 
मीटर है। पहले माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 29,002 फुट या 8,840 मीटर मापी गई थी। वैज्ञानिक सर्वेक्षणों में कहा जाता है कि इसकी ऊंचाई प्रतिवर्ष 2 से.मी. के हिसाब से बढ़ रही है।

तो प्यारे बच्चो यह था आपका खूबसूरत हिमालय।

ग्लेशियर

बच्चों, आपने ग्लेशियर के बारे में भी पढ़ा और सुना होगा, लेकिन हो सकता है इसे लेकर दुविधा बनी हुई हो कि आखिरकार यह होते क्या हैं? कैसे बनते हैं?

बच्चों, पृथ्वी की सतह पर गतिशील विशाल आकार की बर्फराशि को हिमनद (ग्लेशियर) कहते हैं। प्राय: यह पर्वत के ऊपर निर्मित एक हिमखंड होता है, जो पिघलने पर पानी देता है। हिमालय में हजारों छोटे-बड़े हिमनद मौजूद हैं, जो लगभग 3,350 वर्ग कि.मी. क्षेत्र में फैले हुए हैं। कुछ खास हिम खण्डों के बारे में हम आपको बता रहे हैं -

बनागी- यह नंदा देवी विशाल हिमखण्ड के निचले भाग में स्थित है, जिससे ऋषि गंगा नदी बनती है।

बनकुण्ड- यह उत्तर-पश्चिमी गढ़वाल में स्थित है तथा इससे अमृत गंगा नदी बनती है।

बरमा- यह गढ़वाल में चमोली जिले के उत्तर में तथा कालापानी हिमखण्ड के पश्चिम में 0.75 कि.मी. लम्बा हिमखण्ड है।

भगीरथी खरक- यह केदारनाथ के पूर्व में स्थित हिमखण्ड है, जहां से मंदाकिनी नदी निकलती है।

भृगुपंथ- यह गढ़वाल में उत्तरकाशी के उत्तर में गंगोत्री हिमखण्ड को बनाता है।

बूढ़- यह 3 कि.मी. लम्बा हिमखण्ड है, जो गढ़वाल व कुमाऊं की सीमा पर नन्दा देवी के निचली ढाल पर स्थित है।

बर्ला- यह पिंडारी हिमखण्ड के चारों ओर पश्चिमी ढाल पर झूलती घाटी में स्थित है।

चंगा बंग- यह नन्दा देवी पर्वत पर स्थित है तथा इससे ऋषि गंगा नदी निकलती है।

चतुरंगी- यह चौखम्भा पर्वत के निचली ढाल पर स्थित है।

चोर बामक- चमोली जिले के उत्तर पश्चिम में केदारनाथ के निचली ढाल पर स्थित है, जिसका पानी मंदाकिनी में मिलता है।

गंगोत्री- यह 26 कि.मी. लम्बा तथा 4 कि.मी. चौड़ा हिमखण्ड उत्तरकाशी के उत्तर में स्थित है।

कफनी- यह 5 कि.मी. लम्बा व 2.5 कि.मी. चौड़ा हिमखण्ड गढ़वाल व कुमाऊं की सीमा पर नन्दादेवी की दक्षिण-पश्चिमी ढाल पर स्थित है।

कागभुसंड- यह 4 कि.मी. लम्बा हिमखण्ड चमोली जिले के उत्तर में स्थित है।

कालापानी- यह 5 कि.मी. लम्बा तथा 1 कि.मी. चौड़ा हिमखण्ड चमोली के उत्तर में स्थित है।

कामत- यह उत्तर-पश्चिमी गढ़वाल में कामत पर्वत के मध्य स्थित है।

कंकुल खाल- यह हिमखंड चमोली के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में स्थित है।

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